चैक बाउंस मामलों के शीघ्र निपटारे हेतु वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव रत्नावत ने की विशेष न्यायालय की मांग

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

मंदसौर। जिले में चैक अनादृण (धारा 138, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट) से संबंधित करीब 10 हजार से अधिक प्रकरण न्यायालयों में लंबित हैं। इन मामलों के शीघ्र निराकरण और न्याय की त्वरित प्राप्ति के लिए मंदसौर बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव रत्नावत ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंदसौर को ज्ञापन सौंपकर विशेष न्यायालय (स्पेशल कोर्ट) गठित किए जाने की मांग की है।

 

अधिवक्ता गौरव रत्नावत (सदस्य संख्या 428/2006) ने अपने आवेदन में बताया कि वे पिछले 18 वर्षों से मंदसौर न्यायालय में नियमित रूप से वकालत कर रहे हैं। प्रतिदिन यह देखा जा रहा है कि चैक बाउंस के प्रकरणों की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं पुराने मामलों के साथ न्यायालयों पर काम का अत्यधिक भार होने से एक-एक प्रकरण में 6-6 महीने की तारीखें दी जा रही हैं। इससे पीड़ित पक्षकारों को वर्षों तक न्याय के लिए इंतजार करना पड़ता है।

 

उन्होंने बताया कि धारा 138 के अंतर्गत आने वाले ये प्रकरण समरी ट्रायल के अंतर्गत आते हैं, जिनका शीघ्र निपटारा आवश्यक है, लेकिन न्यायालयों में लंबित अन्य दीवानी व फौजदारी मामलों के कारण इनका समय पर निराकरण नहीं हो पा रहा। अधिवक्ता रत्नावत ने कहा कि इससे न्यायालय पर आम जनता का विश्वास प्रभावित हो सकता है।

 

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में मंदसौर में चैक अनादृण प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए एक विशेष न्यायालय का गठन किया गया था, जिससे काफी राहत मिली थी। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए एक बार फिर ऐसे न्यायालय की स्थापना आवश्यक है।

अधिवक्ता गौरव रत्नावत ने न्यायहित में जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंदसौर से आग्रह किया है कि चैक अनादृण प्रकरणों के त्वरित निपटारे हेतु शीघ्र विशेष न्यायालय गठित किए जाने का आदेश प्रदान किया जाए।

Leave a Comment

और पढ़ें